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संजय सिन्हा की कहानी: योग्यता और चाहत

संजय सिन्हा की कहानी का शीर्षक है- योग्यता और चाहत. हम जिस चीज़ के योग्य नहीं होते हैं, उसकी चाहत भी क्यों करते हैं? अंग्रेजी में एक कहावत है- पहले योग्य बनो, फिर चाहो. महाभारत के महान वीर कर्ण की इच्छा थी कि मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार ऐसी जगह हो, जहां कोई पाप न हो. कर्ण ने अपनी ये इच्छा कृष्ण से ज़ाहिर की थी. युद्ध में जब कर्ण की मृत्यु हो गई तो उस जगह की बहुत तलाश की गई जहां पाप न हो. पर हाय री किस्मत! संपूर्ण धरा पर कहीं इतनी-सी जगह भी न मिली जहां पाप न हो. संजय सिन्हा कहते हैं कि जिस किसी को पाप रहित संसार चाहिए, उसे पहले अपने मन से पाप को निकालना होगा. अगर मन से पाप न निकल पाए तो कम से कम पाप रहित धरती पर अंतिम संस्कार की इच्छा तो नहीं ही रखनी चाहिए.